गाया है शंकर महादेवन ने। गीतायन पर खोजें

असल में

मन को अति भावे सैंया, कर ता ता थैया...
मन गाये रे..हाए रे...हाए रे...

विजय वडनेरे ने जैसा सुना/समझा
मने गोवा दिखा दे सैंया, कर ता ता थैया...
मन हाए रे हाए रे हाए रे ....हाए रे..

बकौल विजय वडनेरे,
कुछ दिन पहले घर पर बात हो रही थी गोवा जाने के बारे में, मैने कहा कि चलो गोवा ही चलते हैं वहाँ के लिये तो गाना भी है ..और ये गाना गाया...श्रीमतीजी तो हँस के लोटपोट हो गईं...!!
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चर्चा

यूनुस ख़ान ने लिखा,

अचानक आज सुबह ये गीत याद आ गया--'रंगीला रे'। याददाश्‍त के आधार पर फेस-बुक पर ये पंक्तियां लिखीं---पलकों के झूले में सपनों की डोरी/ प्‍यार ने बांधी जो तूने वो तोड़ी/ खेल ये कैसा रे, कैसा रे साथी/ दिया तो झूमे है रोए हैं बाक़ी/ कहीं भी जाए रे, रोए या गाए रे/ चैन नहीं पाए रे हिया....वाह रे प्‍यार...वाह रे वाह...रंगीला रे.. । तो रमन कौल ने ध्‍यान दिलाया कि 'रोए हैं बाक़ी' नहीं है। गाना सुना तो पता चला कि 'रोए है बाती'
Nuasturarfato ने लिखा,
very interesting, thanks
uvr ने लिखा,
यह गाना शंकर महादेवन ने गाया है? सुखविंदर सिंह ने!

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