गाया है रफ़ी, लता ने। लिखा है आनन्द बक्षी ने। गीतायन पर खोजें

असल में

झोंका हवा का, पानी का रेला

अभिजित देवनाथ ने जैसा सुना/समझा
झोंका हवा का, पानी *करेला*

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