लिखा है गुलज़ार ने। गीतायन पर खोजें

असल में

तेरी बातों में किमाम की खुशबू है
तेरा आना भी गर्मियों की लू है

विभु ने जैसा सुना/समझा
तेरी बातों में *की आम* की खुशबू है
तेरा आना भी *गर्मी-ओ-कीलू* है

बकौल विभु,
और सोचता रहा आखिर ये कीलू क्या बला है
मज़ेदार है!
अरे! मैंने भी यही समझा था!


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